Tuesday, September 29, 2009

ब्लोगवाणी का बदलाव - कई गलत चीजों को जन्म देने वाला है !

सबसे पहले ब्लोग्वानी प्रारंभ करने के लिए धन्यवाद और अपना आभार प्रकट करता हूँ ! इसके साथ साथ ब्लोग्वानी मैं जो बदलाव की बात की है उसपे चर्चा होनी ही चाहिए | और मुझे लगता है कहीं ऐसा ना हो की बदलाव गलत चीजों को जन्म दे दे. मैंने अपनी शंका निचे के शब्दों मैं रही है, शायद कई अन्य लोगों की शंका भी ऐसी ही हो  

BLOGVANI 1. ब्लागवाणी के प्रयोक्ता ही यह फैसला करेंगे कि कौन सा ब्लाग जोड़ना है और कौन सा छोड़ना.  
मेरी शंका : यहाँ पर शायद आप वोटिंग सिस्टम की बात कर रहे हैं | वोटिंग सिस्टम यहाँ फुल प्रूफ़ होना चाहिए | यहाँ ऐसा भी हो सकता है की वोट की संख्या के आधार पे कई बेहतरीन आलेख ब्लोग्वानी से जुड़ ही नहीं पाए | और आप तो शायद जानते ही हैं की हिंदी ब्लॉग्गिंग मैं किसी गंभीर विषय पे कितना भी अच्छा आलेख क्यों नहीं आया हो, टिप्पणी बहुत कम आते हैं| लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं ही होना चाहिए की गंभीर चर्चा वाले आलेख प्रकाशित (पोस्ट) ही ना हो?|  

BLOGVANI 2. सिर्फ ब्लागवाणी के सदस्य ही पसंद कर सकेंगे और यह सब देख सकेंगे कि पसंद किसने की थी ताकी .... हां यह जरूर है कि अब पसन्द/नापसन्द के साथ अनोनिमिटी नहीं रहेगी. यह शायद एक जरूरी पैनल्टी है.  
मेरी शंका : ब्लोग्वानी पे आने वाले हर कोई registered user नहीं होता और हो भी नहीं सकता | मैंने कुछ ऐसे भी लोग देखे हैं जो सीधे ब्लोग्वानी पे आकर लेख पढ़ कर चलते बनते हैं, वो कोई टिप्पणी भी नहीं करते | अब यदि एक पाठक (ब्लॉग लेखक नहीं) को आलेख अच्छा लगा तो वो अपनी पसंद ब्लोग्वानी पे दर्ज नहीं कर सकता |  

BLOGVANI 3. पसंद के साथ ही नापसंद भी लाया जायेगा जिसका प्रयोग भी सिर्फ ब्लागवाणी के सदस्य कर सकेंगे |  
मेरी शंका : हम भारतीय positive बातों के लिए एक जुट नहीं होते पर negative बातें हमें तुंरत एक जुट कर देती हैं | और यदि आपने नापसंद को जोड़ा तो एक ग्रुप बनाकर किसी के आलेख के वास्तविक पसंद को निचे ले आयेंगे | विश्वास कीजिये ये होगा ही | मैं सॉफ्टवेर industry मैं हूँ और पिछले १२ वर्षों से अलग अलग सिस्टम पे काम कर चुका हूँ | कई बड़ी बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पे काम किया हूँ अभी भी एक बड़ी कंपनी का प्रोजेक्ट्स ही देख रहा हूँ | कोई भी सॉफ्टवेर या प्रोग्राम १००% perfect नहीं हो सकता (including NASA, pentagon, Sony, Nintendo etc....). हेकर्स जब पेंटागन, सोनी, Nintendo और ना जाने कितने के चिप डिजाईन सिक्यूरिटी तक को समय समय पे धता बताते रहते हैं | इस हिसाब से क्या आपको लगता है की नापसंद का गलत उपयोग नहीं किया जायेगा ?  

आये दिन हिंदी ब्लॉग मैं व्यक्तिगत विवाद चलता रहता है और दो ग्रुप बन जाता है | उदाहरण देखिये - संगीता पूरी team vs प्रवीन जाखड team | अब इस अवस्था मैं एक ग्रुप वाले दुसरे ग्रुप वाले के आलेखों को नापसंद ही करेंगे |  

समय समय पर किसी भी सिस्टम मैं आवश्यक सुधार और बदलाव होना ही चाहिए, ब्लोग्वानी मैं भी ऐसा ही होना चाहिए | पर बदलाव से पहले उसके सारे positives & negatives पे अच्छी तरह चर्चा जरुर होनी चाहिए | किसी के आलोचना भर से ही डरकर या उन्हें कुछ दिखाने के लिए बदलाव को वास्तविक बदलाव नहीं बल्कि एक emotional भूल ही कही जायेगी | और ब्लोग्वानी के बदलाव का आधार ही इमोशनल दिख रहा है | 

परिवर्तन करना ही है तो पहले मन शांत कर लें, फिर लगभग एक-दो महीने बाद नए सिरे से सोचें की ब्लोग्वानी और हिंदी ब्लॉग्गिंग के भविष्य के लिए क्या बदलाव आवश्यक हैं | अभी तो मन अशांत ही दिख रहा है, और इस अशांत वातावरण मैं शुभ कार्यों का श्रीगणेश उचित नहीं लगता | आशा है ब्लोग्वानी की टीम इस दिशा मैं ध्यान देगी और समय रहते उचित फैसला करेगी | धन्यवाद !

26 comments:

'अदा' said...

Main Rakesh ki baton se sahmat hun.
aisi bandar ghudkiyon se badlaao laana uchit nahi agar vastav mein badlaao ki aavshyakta hai to fir is par chahcha awashayk hai..

Suresh Chiplunkar said...

देखते हैं क्या सामने आता है, फ़िलहाल इंतज़ार करना ही होगा…। कुछ विघ्नसंतोषी अपने मकसद में कामयाब होते-होते रह गये, हालांकि खरोंच तो फ़िर भी पैदा कर ही गये…

Ratan Singh Shekhawat said...

फ़िलहाल इंतजार ही करते है |

berojgar said...

dekhate hain kya hota hai...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

राकेश जी, इस विषय में आपने जो शंकाएं व्यक्त की है...उनसे तो हम भी पूर्णत: सहमत हैं।। अन्तिम दोनों परिवर्तन तो निसंदेह किसी भी प्रकार से ब्लागिंग के हित में नहीं कहे जा सकते....इनका दुरूपयोग होना तो समझिए तय है!!!

Udan Tashtari said...

आपके सुझावों को निश्चित ही ब्लॉगवाणी की टीम ध्यान में रखेगी. अभी समय लगेगा, ऐसा तो वो कह ही चुके हैं.

बेहतर वर्जन का इन्तजार करना चाहिये.

Suman said...

thik hai.

महेन्द्र मिश्र said...

समय की प्रतीक्षा करे आगे देखिये क्या होता है . कुछ अच्छा होने की संभावना अधिक है.

ताऊ रामपुरिया said...

आपकी बात भी सही है. लेकिन यकीन रखिये कि अब जो भी सिस्टम वो लागू करेंगे उसको बडा सोच समझकर ही लागू करेंगे. और हमें अच्छे की ही उम्मीद करनी चाहिये.

रामराम.

रंजन said...

registered users kaa idea achchaa he.. baki do se kuch hal hotaa nahi dikhataa..

Mithilesh dubey said...

आपके बातो से बिल्कुल सहमत हूँ ।

डा. अमर कुमार said...


उत्तम विचार और तर्क हैं, विचार किया ही जाना चाहिये ।

Mohammed Umar Kairanvi said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Sudhir (सुधीर) said...

आपकी शकों को निर्मूल महीन कहा जा सकता. उम्मीद जकार्ता हूँ की ब्लोगवाणी इन शंकाओं पर ध्यान देगी और उचित व्यवस्था लाएगी,

Pankaj Mishra said...

राकेश जी आपकी बात सही है .

सतीश सक्सेना said...

बहुत बढ़िया और सामयिक , शुभकामनायें !

जी.के. अवधिया said...

राकेश जी, आपकी बातें सही हैं, समस्याएँ बहुत सी आयेंगी। तो क्या आशंकाओं, सन्देहों और समस्याओं के भय से किसी अच्छे कार्य को बंद कर देना चाहिए? यह भी सही है कि यदि कुछ लोग सन्तुष्ट होंगे तो कुछ लोग असन्तुष्ट भी होंगे पर प्रयास यह होना चाहिए कि अधिकतम लोग सन्तुष्ट रहें क्योंकि असन्तुष्टि का मुख्य कारण खामियाँ न होकर हमारी स्वार्थ की मानसिकता ही होती है।

मुझे विश्वास है कि ब्लॉगवाणी को नया रूप देते समय आपकी बातों पर पूरी तरह से ध्यान दिया जावेगा। मुझे तो तकनीकी ज्ञान नहीं है किन्तु मैं समझता हूँ कि आप जैसे तकनीकी विशेषज्ञ लोग मिल जुल कर सभी समस्याओं का हल खोज निकालेंगे।

एक अच्छी और सार्थक चर्चा चलाने के लिए धन्यवाद!

खुशदीप सहगल said...

राकेश जी, आपकी एक-एक शंका जायज़ है...मैंने भी अपनी पोस्ट...ताकि फिर कोई उंगली न उठाए...में कुछ सुझाव दिए थे...पहला तो ये पसंद-वसंद का चक्कर सिरे से ही खत्म कर दिया जाए...इसकी जगह एक रोटेशन कॉलम हो...जैसे 100 पोस्ट का एक ब्लॉग...जो आधे घंटे के अंतराल के बाद बदलता रहे...जिसमें सिर्फ पोस्ट का शीर्षक और लिखने वाले का नाम ही दिखता रहे...किसी पोस्ट को एक हफ्ता बीतने के बाद अपने आप ही वो रोटेशन कालम से हटा ली जाए...इस तरह सभी को मौका मिलता रहेगा...अच्छे आलेखों को भी और नए ब्लॉगर्स को भी...फिर किसी की मैनीपुलेशन के साथ अपना नाम ज़्यादा पसंद या ज़्यादा पढ़े जाने वाले कालम में ऊपर लाने की गुंजाइश ही नहीं बचेगी...

दर्पण साह "दर्शन" said...

prashn to vichaarniya hain bhai...

aur agar koi computer visheshgya ye keh raha ho to to phir to aur bhi...

Science Bloggers Association said...

Parivartan prakrati ka niyam hai.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुझाव उत्तम हैं।

Atmaram Sharma said...

राकेश जी के विचारों से सहमत.

मसिजीवी said...

मुझे लगता है कि पूरी योजना को जानकर ही कुछ कहा जा सकता है। उल्‍लेखनीय है कि पंजीकृत प्रयोक्‍ताओं तथा उनमें से भी कुछ विशिष्‍ट को मॉडरेशन के चंद अधिकार देने का प्रयोग चिट्ठाजगत में पहले से है तथा मेरी जानकारी में इससे कुछ विशेष दिक्‍कत भी नहीं आई है।

दिगम्बर नासवा said...

राकेश जी का सुझाव विचारनिय है .......... ध्यान रखने योग्य है ......... आशा है ब्लोग्वानी वाले इस बात का ध्यान रखेंगे ..........

प्रवीण जाखड़ said...

अरे वाह राकेश जी। मेरे भी कोई ग्रुप है। शुक्र है हमारे विचारों से सरोकार कुछ लोग रखते हैं। अच्छा लिखा आपने। ब्लॉगवाणी नया अवतार बनकर उभरेगी। कामना करेंगे। आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हंू। अच्छा लगा इसीलिए फॉलोअर भी बन गया हंू।

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

sahi samay par sahee naseehat...vastav me...