Friday, August 7, 2009

सुगना मुंडा की निश्चिंतता ...

सुगना मुंडा, जाती से आदिवासी और मुसाबनी प्रखंड (झारखण्ड) के एक रिमोट गाँव का निवासी, पिछले पॉँच वर्षों से घाटशिला कारावास मैं | जाहिर है कुछ न कुछ संगीन अपराध तो किया ही होगा | अपराध तो उसने किया था - लगभग ५ वर्ष पहले एक मुर्गा चोरी किया था ! चौकाने वाली बात मुर्गा चोरी की साजा ५ वर्ष ? असल मैं उसे अब तक साजा सुनाई ही नहीं गई है | कारावास के पहले ४ वर्षों मैं सुगना के केस मैं कोई सुवाई हुई नहीं | वकीलों को देने को पैसे नहीं, सो उसने कभी अपील ही नहीं की | ४ वर्षों मैं कारावास जीवन का ऐसा अभ्यस्थ हो गया की अब वो बाहर आना ही नहीं चाहता | कहता है बहार जाकर क्या करूंगा , कम से कम यहाँ खाना तो मिल रहा है |

लगभग साड़े चार वर्षों के बाद सुनवाई की बारी आयी ...., लेकिन इस समय तक सुगना ने कुछ और सोच रखा था , उसने magistrate को उलटा-सीधा कह दिया, magistrate ने भी आवेश मैं उसे सजा ही नहीं सुनाई | साजा सुनाया जाता तो बा-मुस्किल ये ६-८ महीने का होता और वो तुंरत बहार निकल जाता | सुगना ने ये सब जान बुझ कर किया ताकि जेल मैं उसे दो वक़्त की रोटी मिलती रहे |

पता नहीं अगली सुनवाई कब होगी ? क्या पता अगली सुनवाई की उसे आस भी है या नहीं ? उसके चेहरे पे कोई पश्चाताप, उदासी या विद्रोह का भाव भी नहीं झलकता | उसके जीवन मैं एक अजीब सी निश्चिंतता दिखाई देती है |


(ये कहानी है सच्ची, पात्र के नाम याद नहीं इसलिए एक अलग नाम दे दिया है)

7 comments:

loopystitch said...

Hamaree nyay wyawastha behad puratan aur ghisi piti ho gayi hai..!

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raj said...

azeeb baat hai na koee khud jail me rahna chahta hai..dekhiye duniya rahne ke kabil nahi rahi....boht achha likha apne...

दिगम्बर नासवा said...

KABHI KABHI INSAAN VYASTHAA SE ITNAA PARESHAAN HO JAATA HAI KI VO VIDROHI HO JAATA HAI...... ISME USKA DOSH N HO KAR HAMAARI SARKAARI VYAVASTHAA KA DOSH HAI..... PAR MEGISTRATE NE APNA DHARM NAHI NIBHAAYA USKO SAJAA DE KAR......SAJAA KEVAL JUSM KI HI HONI CHAAHIYE N KI PERSONAL DOSH KI.....

जगदीश त्रिपाठी said...

यह हमारी न्यायिक व्यवस्था का सबसे दुखद पहलू है। देर से मिला न्याय निश्चित रूप से न्याय नहीं रह जाता। इस घटना से उदारीकरण और देश की प्रगति का ढिंढोरा पीटने वाले सबक लें। आज भी हालात ऐसे हैं कि देश की बहुत बड़ी आबादी के पास रोटी हासिल कर पाने का कोई जरिया नहीं। विचारोत्तेजक पोस्ट। आभार

sarwat m said...

ये है हमारी न्याय व्यवस्था. दूसरा पहलू गरीबी है. सरकार इसे प्रशासनिक दोष बतायेगी. लगता है प्रशासन पर सरकार का कोई वश नहीं या प्रशासनिक गलतियों की जिम्मेदारी सरकार की नहीं. सुगना का मामला तो कुछ भी नहीं, यहाँ जेलों में ऐसे ऐसे कैदी ४० - ४० वर्षों से बंद हैं जिनके जुर्म का पता शासन, न्यायपालिका तथा पुलिस को भी नही. सुप्रीम कोर्ट कह ही चुकी है--"ये देश भगवान भरोसे चल रहा है."

दर्पण साह "दर्शन" said...

kise hai fursaat...
....padha,haath jhada aur chal diye.

par koi to hal nikale...
koi to hal ho !!

'अदा' said...

sugna samajhdaar hai....bahar usko do vakt ki roti ke liye kitna bhugatna padta ye wahi jaanta, aur jeewan, jail se bhi badtar hoti isliye usne yah kiya...
hamara samajik parivesh itna jatil aur kathin hai ki sugna jaise logon ke liye jail se accha sort-cut koi hai hi nahi....